कविता : त्यौहार बैसाखी

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 कविता : त्यौहार बैसाखी 
आज पीला है रंग माँ के परांदे का,
बहन ने पीला सूट है सिलवाया,
बच्चों ने हाथ पीले लड्डू लगे, 
बापू ने पीला दस्तार है सजाया

लह रहा रही है पीली सरसों,
नसों में युवा जोश भर आया
नुक्कड़ पे गिद्दे की बोलियां गूंजी, 
ढोल की थाप ने पैरों को थिरकाया

बैसाखी पे मत-भेद मिटाये जाते हैं,
अपने-पराये सभी गले लगाये जाते हैं
लहराती है फसलें जब, चेहरे खिल जाते हैं,
कष्ट भरे बीते दिन, किसान सब भूल जाते हैं

झिलमिल है घर आंगन आज,
बसंत साथ लिए नव वर्ष है लाया
नई उम्मीद के साथ स्वागत करो,
झूमो नाचो गाओ त्यौहार बैसाखी आया




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